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Saturday, September 15, 2012

अहमदाबाद का चार रास्ता



                 अहमदाबाद का चार  रास्ता 


                          लगभग दो माह पूर्व मेरी पोस्टिंग अहमदाबाद मे ,हुई थी मेरे ऑफिस का पता था ,अंकुर चार रास्ता  ,अहमदाबाद मे ,चोराहे को चार रास्ता कहते है ,।विजय .पल्लव ,भुयंग्देव ,आदि कई चार रस्ते यहाँ है ।इक जगह बोपल (bopal ) भी है जिसे मै  शुरुआत मे  मध्य -प्रदेश की राजधानी समझकर सोचता था की चलो यहाँ से भोपाल के लिए सीधी बस तो चलती है । 

                   यहाँ पर कई चेम्बर भी है हमारा ऑफिस भी जीवाभाई चेम्बर मे  है ,चिमन  भाई ,धनजी भाई और कई गुजराती  धन कुबेरों, साहुकारो के नाम के चेम्बर यहाँ पर है ।
  
                  बोलचाल मे मे  दो-तीन  शब्द  काफी प्रयोग होते है ,बरोबर जिसका मतलब मेरे अनुभव के अनुसार ठीक   होता है ।किसी से कुछ कहो तो तुरंत बोलेगा बरोबर । हर पुरुष यहाँ भाई या मोटा भाई (बड़ा )होता है और हर स्त्री  बहिन जिसे लहजे  मे बेन  कहते है । मध्य -प्रदेश मे इंदौर मालवा मे भाई  भिया और बुंदेलखंड मे  बड्डे बन जाता है ।

         लगभग दो माह के बाद अहमदाबाद से जा रहा हूँ ,हमेशा की तरह यहाँ कुछ नए शब्द सीखे ,कुछ नए चेहरे, नामो  ,जगहों से परिचय हुआ । सरकारी ऑफिस की पुराने ऑफिसरो की कहानिया और अनुभव सुने ।कई तरह का इतिहास जाना   ।ये भी पक्का है की जिन लोगो से मै  मिला उन लोगो ने भी मेरा इतिहास और मेरी कहानिया रची  होंगी जो की ऑफिस कल्चर का  इतिहास बन जायेगा ।

        जिंदगी मे अचानक कई नाम,जगह ,व्यक्ति आते है और वो हमारी जिंदगी का सबसे चर्चित हिस्सा बन जाते है ।इंदौर मे  रीगल  चोराहा ,फिर दिल्ली मे  मुखर्जीनगर, शास्त्री भवन नई दिल्ली से लगभग तीस साल का रिश्ता ,गुडगाव हरियाणा के  मानेसर की जिन्दगी भर की यादे ।

और अंत मे  अहमदाबाद चार रस्ते के बाद पता नहीं अगली मंजिल जिन्दगी का कोन   सा चार रास्ता हो 

धन्यवाद अहमदाबाद !!!!!
    
    

Saturday, September 1, 2012

मिनरल वाटर बनाम पानी

मिनरल वाटर बनाम पानी 
 

   आज  कल अहमदाबाद मे  इक  अजीब सी समस्या से रूबरू  हु । पीने के पानी की  यहाँ आते ही लोगो ने  कहा की पानी अच्छा  नहीं  है सो  मैंने भी  पानी बुद्दिमत्ता से इक मिनेरल वाटर  बाले से घर पर 60 रूपये  मे 20 लीटर पानी लगवा लिया ।और मे भी साफ पानी पीने का दावा  करने बालो  की जमात मे शामील हो गया ।असली मजा मुझे  तब आया  जब मेरा मिनरल वाटर बाला आना बन्द हो गया । अब हालत ये है की मेरे  कमरे मे  प्रति दिन के हिसाब से 3 बोत्तेले जमा  होती जा रही है .इनकी  संख्या 90 पहुच  गयी है ।
  
सरकार साफ पानी सभी को देने का  वादा करती है। हालत ये है की दिल्ली  की सबसे vip  जगह पर साफ पानी नसीब नहीं होता ।अब बड़े शहरो मे मिनेरल वाटर का चलन बढता जा रहा है और लोग पानी पीना छोड़ते जा  रहे है ।पहले चोराहे पर सरकारी पियांयु होती थी या राहगीरों को पुण्य कमाने के लिए मुफ्त पानी पिलाया जाता था ।होटलों ,चाय ,पान की दुकानों पर पानी मुफ्त मिलता था , मगर अब पानी नहीं मिनेरल वाटर मिलता है 1 रूपये मे ।छोटे से छोटे गाव शहरो  मे चाहे  पानी ना  पंहुचा हो  लेकिन मिनेरल वाटर  आसानी से मिल जाता है ।

सरकारी दफ्तरों मे या तो लोग घर से पानी लाते है या फिर यहाँ भी मिनेरल वाटर मिलता है ।सचिवालय से लेकर कलेक्टर कार्यालय  तक कही भी पानी नहीं है ।न  जाने क्यों नेता -प्रसाशक सबसे ज्यादा मिनेरल वाटर मीटिंग मे पीते है .मीटिंग मे कुछ हो न हो मिनेरल वाटर जरुर होता है ।टीवी  पर मीटिंग मे  बढ़िया मिनेरल वाटर की बोत्तले दिखती है ,मीटिंग के बजट का बड़ा हिस्सा मिनेरल वाटर मे जाता है ।बचा हुआ मिनेरल वाटर किसके घर  है ये बताने की जरुरत नहीं ।

अपने आसपास  सबसे  ज्यादा प्रदुषण  इस मिनेरल वाटर के बोट्टेल और पाउच से होता हे .ये पानी महीनो पुराना होता है .isi मार्क भी नहीं होता .इक ही मिनेरल वाटर 12,16, और माल ,एयर पोर्ट पर 45 रूपये लीटर मिलता है ।

 मुद्दा ये है की हमारा पानी के  प्रति विश्वाश ख़तम हो चला है।मिनेरल वाटर के लिए बढता जा रहा है ।आरो ,वाटर प्युरिफाएर ,पानी पाउच और  ,मिनेरल वाटर का न केवल बहुरास्ट्रीय ,राष्ट्रीय बल्कि स्थानीय कम्पनी ,दुकानदारो  का अच्छा -खासा  व्यापार  बन गया है . अब घर -घर मे    इस  की पूर्ति होने लगी है।

 सबाल ये भी है की जब हम संसद ,सचिवालय ,कलेक्ट्रेट ,मे पानी नहीं पहुंचा पाए तो लोगो तक पहुचने मे कितना समय  लगेगा । 

 जमीन ,पेट्रोल ,और सब्जियों के बाद अब पानी ,नहीं  मिनेरल वाटर के हमारी पहुँच से  दूर हो जाने की वारी है ??
"रहिमन पानी राखिये , बिन पानी सब सून ।  
पानी गए न ऊबरे मोती ,मानस चून ।।"

Wednesday, August 29, 2012

फेसबुक पर एटीट्युट

फेसबुक पर  एटीट्युट
 
  अभी अभी इक नया ट्रेन्ड आया आया  है  फेसबुक पर ,आम तोर पर हम  हजारो दोस्त बनाते है .मगर सेट्टिंग मे जाकर  फ़्रेन्ड लिस्ट चेट्टिंग आदि को ऑफ या हाइड कर कर  देते है ,कई बार तो ऐसे हादसे  भी हुए की जैसे  ही चेट्टिंग मे आया की some one is typing .........कई लोग लोग ऑफ लाइन हो  गए .मगर  कहते है न की "संचार (communication ) को रोका नहीं जा सकता "  ...........  फेसबुक ने भी विकल्प दिया की "some one sees you as offline but you can still send  message "

Thursday, August 23, 2012

न पेड़ रहे न गोरैया

न पेड़ रहे न गोरैया 

       बचपन से ही काँटी हटा दमोह ,और सागर आना -जाना लगा ही रहता था जब हटा से काँटी जाता तो रस्ते के पेड़ गिनता जाता था  गाव शहर के लोग पेडो से जुडी कई कहानिया भी सुनते थे . रस्ते मे  कोई परिचित मिल जाये तो पल दो पल पेड़ के नीचे ठहरकर हाल चाल भी जान लेते थे 

बड़े अस्पताल से काँटी तरफ जाने पर हमारे पुरखो की तरह कई पुराने पेड़ खड़े रहते थे पुल के पास के पेड़ देखकर घर के पास हटा आने का अहसास होने लगता था 
   
इस बार राखी पर घर गया तो देखा की जिन बड़े बड़े पेड़ो  को मैं लगभग 25 साल से देखता आ रहा था अचानक गायब हो गए ,बाद मे  पता चला की हाई वे बन रहा है इस लिए उनको काट  दिया गया .जिन लोगो  के पास कार  मोटर साइकिल नहीं है उनको छाव देने बाले पेड़ अब नहीं रहे .हटा शहर के अधिकांश लोग सुबह -सुबह सैर पर यही आते थे .अब शहर मे  सैर सपाटे के लिए जगह ही नहीं रही .गंगा झिरिया अब कालोनी बन चुकी है .
   
हटा शहर मे कई पते तो पेड़ो के नाम से जाने जाते है न जाने कब पते खो जाये .रामगोपाल जी मंदिर के पास सुरई घाट पर  भी इक पीपल का पेड़ हुआ करता था .पिछले साल आई बाड़ मे  बह गया .इक पीपल गोरी शंकर मंदिर के बाहर था अब वो भी गया .

अधियारा बगीचा मे पहले पेड़ो की अधिकता के कारण दिन  मे भी अँधेरा हुआ करता था ,धीरे -धीरे यहाँ का जंगल सिमटता जा रहा है 

      हटा से दमोह और दमोह से सागर सभी पेड़ो को उखाड़ फेंका गया है .गोरैया चिड़िया शायद इसलिए अब नहीं दिखती घरो के रोशनदानो को हमने बंद  कर दिया .घर के बाहर गेहू सुखाना बंद कर,गोरैया के दाना पानी के साथ अब उसके घर को भी छीन लिया

अगर सही ढंग से योजना बनाकर हाई वे  बनाया जाता तो हमारे तरुवर बच सकते थे ,दिल्ली  गुजरात  मे पेड़ो को काटे बगैर ही हाई वे बनाये जा रहे है जो देखने मे तो सुंदर है ही राहगीरों को ,मजदूरों को शरण देते है सो अलग.

Monday, August 20, 2012

श हरी कलरव

श हरी कलरव 

सुनाई देता है 
बस टेम्पो का होर्न ,ट्रेन के आवाज 
बहु मंजिल इमारतो के टूटने फूटने की दास्ताँ 
किसी घर से तेज आवाज मे बजते गाने 
दरबाजे पर  ए सी  के गर्म थपेड़ो के साथ आवाज 
यहाँ मंदिरों  मे भी सन्नाटा पसरा रहता है 
चिड़िया ,तोते ,बिल्लिया अब कहा दिखती है 
माँ अब कहा इनके साथ किसी को खेलने को कहती है 
अब तो सिन्सेन ,ओग्गी ,टॉम जेर्री हमारे साथी हो गए है 
भालू बन्दर ,गाय तो खो गए है 
नए जमाने  मे कुत्तो के ठाट हो गए है 
दादी माँ की जगह अब कहानिया टी वी  सुनाने लगा है 
चिट्टी को तो पहले हे मोबाइल मर चूका है 
अब ना तो सावन होता है न झूले पड़ते है 
न ही चोपलो पर लोग बैठते है  
फेसबुक पर   नए दोस्त रोज जुड़ते है 
पानी को नदियों से लाती पनिहारे अब कहा मिलती है 
अब तो बिसलेरी के बोत्ले घर पर ही मिलती है 

कम्पयूटर के इस युग मे तश्वीरे भी अब झूठ बोलती है 






Sunday, August 19, 2012

उप काशी हटा जहा बहती है सरिता सुनार

उप काशी हटा जहा बहती है सरिता सुनार                  

          दमोह भारत के मध्य प्रदेश प्रान्त का एक शहर है। यह सागर संभाग का एक जिला और बुंदेलखंड अंचल का शहर है। हिन्दू पौराणिक कथाओं के राजा नल की पत्नी दमयंती के नाम पर ही इसका नाम दमोह पड़ा। अकबर के साम्राज्य में यह मालवा सूबे का हिस्सा था. इस नगर में शिव, पार्वती एवं विष्णु की मूर्तियों सहित कई प्राचीन प्रतिमाएँ हैं। दमोह में दो पुरानी मस्जिदें, कई घाट और जलाशय हैं। दमोह का 14 वीं सदी में मुसलमानों के प्रभाव से महत्त्व बढ़ा और यह मराठा प्रशासकों का केन्द्र भी रहा। ऐतिहासिक नगर दमोह के आस-पास का इलाका पुरातत्त्व की दृष्टि से समृद्ध है।
    
   इसी जिले की इक तहसील है हटा ,इस नाम के पीछे हाट -बाजार का अपभ्रंश भी है और गोंड शासक हट्टे शाह का इतिहास भी .शहर की अपनी ही तशीर है शिक्षा ,राजनीती और व्यापर मानो  सरस्वती ,लक्ष्मी और चाणक्य की त्रिवेणी से है जो की सुनार के संगम आकर मिलती है ,
  
बनारस मे गंगा माता जैसे सारे शहर  को गोद  मे बैठाये है वैसे ही हटा मे  सुनार नदी है .नदी के किनारे ही पूरा शहर बसा है शहर को इसके मोहल्लो के नाम से जानकर लगता है की सभी देवी देवता इसी शहर मे है बिहारी जी मंदिर के पास हजारी घाट है जो यहाँ के हजारी परिवार  के नाम से जाना जाता है 

सुनार मे  आगे रामगोपाल जी वार्ड है जहा सुरई घाट है यहाँ गुरु का मंदिर प्राचीन शिव मंदिर रामगोपाल जी का दरवार है अभी अभी साईं बाबा का मंदिर भी बन गया है .ये सुनार का सबसे सुंदर घाट है मेरा बचपन इसी घाट पर खेलते हुए बीता है ,मंदिरों मे बचपन की कई यादे है 10 गज की पिच पर बनाये हजारो रन ,चोर सिपाही के खेल ,मंदिर तक की दोड़ और सबसे  ज्यादा  सुनार नदी मे सुबह से दोपहर तक का स्नान ,,मोहल्ले से चंदा जोड़कर जलाई गई होली और बजे हुए पैसो के समोसे जलेबी 
  
आगे  शीतला देवी विराजमान है इनकी शहर पर बड़ी कृपा  मानी जाती है ,आगे शमशान है इसी शमशान के किनारे महादेव शिव का प्राचीन मंदिर है ,वार्ड का नाम है गौरी शंकर ,भोले बाबा शमशान के पास क्यों विराजमान है इसके पीछे भी कई दन्त कथाये है .नगर  पालिका ने यहाँ बुन्देली मेले के लिए मंच और  मंगल कार्यो के लिए मंगल भवन बना दिया है ,हाल ही मे  माँ पीताम्बर पीठ भी स्थापित हो गयी है .यहाँ विकाश काफी तेजी से चल रहे है

 शहर के बीचो बीच माँ चंडी बिराजमान है वार्ड नाम जाहिर है चंडी जी वार्ड ही होगा यही पर गायत्री शक्ति पीठ है माँ संतोषी का मंदिर है  

इसके अलावा शहर भर मे गुजरातियों के भी मंदिर है,यहाँ थाने मे थाने का मंदिर है शहर के बीचो बीच बालाजी का मंदिर है और वार्ड नाम बालाजी बार्ड है इस मंदिर के चारो और व्यापर और शहर का कभी विकाश हुआ है 

  इसके अलावा समाज जनों के कई मंदिर  है जैसे नामदेव मंदिर कर्मा  मंदिर 

 जैनों के दो प्राचीन मंदिर भी है जो इनके प्राचीन समय से व्यापारिक और शांति प्रिये नगर होने का प्रमाण देते है ,सरकारी बस स्टैंड के पास विसाल मस्जिद है और सहर के बीच मे नीम बाले बाबा की दरगाह जहा सभी धर्म के लोग सर झुकाते है सहर का मिजाज शांति  प्रिय है 

   दशहरे पर सभी वार्डो के अखाड़े जैसे राम गोपाल जी सरकार ,बालाजी सरकार आदि सभी के आकर्षण का केंद्र होते है इन दो अखाड़ो मे  परंपरागत प्रति स्पर्धा  चलती है 

 राजनीती के तीन अखाड़े है बड़ा बाजार ,रतन बजरिया और तीन बत्ती तिगड्डा बड़ा बाजार बड़ा क्यों है पता नहीं पर रतन बजरिया सुनारों का प्राचीन बाजार है शायद रत्नों -आभूषणो के व्यापरिक केंद्र के कारन यह नाम पड़ा है .तीन बत्ती का नाम भी क्यों पड़ा मुझे पता नहीं .राजनीती की सारी विसाते यही बिछती है .दिनभर शहर के खास और आम सभी यहाँ आते जाते रहते है

      शहर मै अग्रवाल ,जैन ,सुनार ,ब्रह्मण ,राजपूत ,नेमा ,बहुत बड़ी संख्या मे है  जो इक बड़े व्यापारिक और राजनीतिक केंद्र का संकेत देते है 

 शहर ने शिक्षा और राजनीती मे भी काफी पहचान बनाई  है  कन्या स्कूल ,साइंस आर्ट  कामर्स कालेज के साथ नावोदय  भी है psc  मे शहर  का सिक्का काफी चलता है और डाक्टर इन्जेनेअर पहले से बनते आये है

  अब सुनार पर पुल बनाकर गाव और शहर की दूरी कम कर दी गयी है ,मुझे हमेश से सुनार मै पर्यटन की सम भावनाए दिखती है क्योंकि इसका सौंदर्य निराला है अभी तो शहर मे वैसा कल्चर नहीं आया है की लोग सुनार के घाट को पर्यटक की तरह देखे और और नाव पर उपकशी के मंदिरों का दर्शन लाभ ले पर आगे जरुर ऐसा होना चाहिए ये रोजगार ,पैसे और सबसे बड़ी बात शहर को इक पहचान देगा .

 रेल के लिए ये शहर काफी  दिनों से लड़ रहा है जिस दिन वो आ जायेगी वो हटा  के विकाश की नई इबारत होगी 

 हटा मे  जब भी आप प्राचीन  किले  को चीरते हुए आयेगे सुनार का तट बाहे फैलये आपका स्वागत 
करेगा 

अहमदाबाद नहीं 'अमन का शहर कहिये'

अहमदाबाद नहीं 'अमन का शहर कहिये'


       11 जून 2012 को प्रातः 7.05 बजे जब मै  इस अजनबी से शहर मे पोस्टिंग पर   आया तो तमाम पुरानी जगहों जहा  मै रह चूका था उनकी अच्छी -बुरी सब बाते दिमाक मे थी सागर बुंदेलखंड की ठसक ,मालवा के इंदौर ,उज्जैन के भोजन और मेहमान नवाजी के साथ इंदौर के रोजगार व्यापर ,और पैसा  इलाहाबादी संघर्ष दिल्ली सा दिल सभी कुछ इक ही जगह पर यदि देखना है अहमदाबाद सबसे बढ़िया है  !
    

          अमिताभ बच्चन के किसी गाने मै "तनु प्रेम करू छू " मे  पहली बार गुजराती  सुनी  थी  फिर 3 idiots मे करीना कपूर का ये कहना की "तुम गुजरती लोग इतने स्वीट होते मगर .." और जन गन मन मे तो सिंध भी है गुजरात भी !


            शहर की बसाहट बड़ी ही सुन्दर है साबरमती को अब नए तरीके से सजाया जा रहा है बढ़िया बात ये है गुजराती  लोग ये जानते ही की आपको गुजराती नहीं आती हिंदी मे बोलने लगते है!मै किसी शहर के मिजाज को वहा के ऑटो बालो चाय पान बालो के मिजाज से समझने की कोशिश करता हु ,इस मामले मे भी इस शहर मे  आपको बढ़िया लोग मिलेंगे 

     आवारागर्दी करते सिगरेट -बीडी और दारू पीते लोग यहाँ कम मिलेंगे !पर खाने पीने के मामले मे ये शहर इंदौर को पीछे छोड़ देता है यहाँ हर रोज लोगो का झुण्ड खाने पर टूट पड़ता है बड़ी बात ये है की लोग अभी भी परंपरागत भोजन ज्यादा पसंद करते है !

    सबसे बढ़िया बात है महिलाओ की आज़ादी और सुरक्षा  रात मे चोराहे पर  महिलाये बिना किसी भय के सेर सपाटे निकल जाती है.पहनावे से आमिर गरीब का पता नहीं लगया जा सकता गुजराती  लोग ऐसा लगता है की शो बजी कम ही करते है ,इक ही ठेले पर आमिर गरीब जो की उनकी कारो से पहचाने जाते  है साथ मे खाखरा ,फाफडा ,ढोकला ,खाते मिल जायेगे .
  
      चाय के साथ  नमक काली  मिर्च तुलसी पीने के प्रयोग मैंने भी किये है अहमदाबाद मे  पुदीने बाली चाय भी पीने को मिल  गयी 

    इक अजीब सी रेस ,बातावरण मे इक अजीब सा शोर सडक ट्रेन और बसों मे  लड़ते झगड़ते पब्लिक प्लेस पर गालिया बकते लोग मैंने अभी तक नहीं देखे .

    यदि पैसा और शांति दोनों चाहिए तो गाँधी जी के  इस प्रान्त मे अमन के साथ रह सकते है,यहाँ पैसा बरसता तो है पर जहा लोग प्रयास करते है ये बात अलग है की यहाँ शायद आपकी राह आसन हो जाये , !!!!!!.....

Wednesday, August 15, 2012

समय के साथ मै ऑफिसर बनता गया

समय के साथ मै ऑफिसर बनता गया 


 गलिओ मे खेलते बच्चो के साथ खेलना 
सडको पर मिलते समोसे 
सस्ती बस का सफ़र 
जनरल  से ट्रेन का सफ़र 
सस्ते खाने की खोज 
चौराहे पर दोस्तों के साथ चाय की चुस्किया 
बिन बजह किसी खास घर के चक्कर 
मोहल्ले के बड़े बूदों से बात 
गाव मे  साईकिल का सफ़र 
घर का गेहू पिसाने ,पानी भरने ,गाडी धोने का काम 
अपने कपडे धोने का काम 
घर के दरजी से सिलवाये हुए कपडे 
 ये सब  मै नहीं करता 

समय के साथ मै ऑफिसर बनता जा रहा हु 
अपनों से अपने आप से कटता जा रहा हु 

सरकारी ऑफिस की सरकारी चाल

सरकारी ऑफिस की सरकारी चाल 


   हर रात सोने से पहले कल क्या करना है सोचता हु 
   सुबह उठ कर तेजी से ऑफिस भागता हु 

   चपराशी की सलाम पाकर अपने ऑफिसर होने के शक को यकीन मे बदलता हु 
   ऑफिस की सीडिया  चदते -चदते सबको देखता हु 

   कोई बाबु कभी नज़रे चुरा लेता है कही नमस्कार न करना पड़े 
  कभी कुछ अजनबी से चेहरे आकर बेबजह ही जी हजुरी करने लगते है 

अपनी सीट पर पहुच कर पानी अख़बार पाकर मन ही मन चपराशी को धन्यबाद देता हु 
कुछ पुरानी सी फाइल देखकर घबरा उठता हु 

फाइल को कोने मे  खिसकाकर कंप्यूटर चालू करता हु 
फिर फेसबुक पर सारे  अपडेट करता हु 

घडी को देखकर लन्च  का इंतज़ार करता हु 
लंच से लोटकर इक झपकी कुर्सी पर बैठे बैठे मारता हु 

घंटी बजाकर चपराशी से बाबु को बुलबाता  हु 
सुनकर बाबु आज नहीं आया मन ही मन मुस्कुराता हु 

हज़ार बार बाबु को कोसता हु फिर सारे  सिस्टम को कोसता हु 
फिर चाय के साथ अपना गुस्सा पी जाता हु 

दिनभर की कड़ी मेहनत  के बाद फिर फेसबुक पर अपडेट करता हु 
सरकारी ऑफिस की सरकारी चाल  कोई नहीं सुधर सकता 

20 लाईक 30 कमेंट्स पाकर थैंक्स बोलकर घर आ जाता हु  
हर रात सोने से पहले कल क्या करना है सोचता 


Sunday, September 18, 2011

संजीव पाठक की कलम से



चेहरे दिलों का हाल बोलते हैं
आइने रोज नए सवाल बोलते है
मै हरदम सीधी बात करता हूँ
लोग जाने क्यों बबल बोलते है
चेहरे दिलों का हाल बोलते हैं
आइने रोज नए सवाल बोलते है
मै हरदम सीधी बात करता हूँ
लोग जाने क्यों बबाल बोलते है

Wednesday, May 4, 2011

दिल्ली से इंदौर

         ६ अप्रैल को दोपहर मै घर से फ़ोन आया की मेरा जोइनिंग लैटर आ गया है मेरी पोस्टिंग इंदौर हुए है    मैंने सोचा की आराम से ज्वाइन कर लूँगा पर पता चला की कल ज्वाइन करना ज्यादा बेहतर होगा सो अब समस्या थी  की कैसे ज्वाइन करू दिल्ली से इंदौर जाने के लिए मैंने फिर  वायुयान  का सहारा लिया पहली बार हवाई यात्रा थी जब मे जमीन से उठ रहा  था तब पता चला की आसमान   आसमान है मैंने आकाश से दिल्ली का ऐसा नज़र देखा जिसकी मैंने कल्पना तक नहीं  की थी जमीन पर कुछ चोकोर से घर आभाष दे रहे थे  मैंने पाया की आसमान से देखने पर जमीन की जमीनी हकीकत नहीं दिखती न तो कोई गन्दा घर दीखता है न सूखी नदी न ही कोई गन्दा नाला और जब ये ऊंचाई बदती जाती है  तो जमीन के साथ साथ आसमान भी सामान होता जाता है  जब मेरे यान ने उचाई पकड़ी तो मेरे साथ दो और  यात्री बैठे थे लेकिन कुछ देर बाद बे उठ कर चले गए  मै अपनी सीट पर अकेला बैठा था जैसे जैसे जहाज़ हवा मै बढता जा रहा था मेरी हवा गोल होती जा रही थी इक समय ऐसा आया की जहाज़ ने उपर उठना बंद कर दिया फिर डर लगना बंद हो गया हमारा    जीबन भी ऐसा हे है जब हम इक उचाई पर पहुच जाते है तो हमें  कभी किसी बात पर न तो हर्ष होता है न दुःख  हम बस अपने  उद्देश्य को ही देखते है  खेर रात २ बजे इंदौर जाने का कार्य क्रम सुबह 6:45  पर समाप्त  हुआ   इंदौर पहुचकर पहले तो मेडिकल बनवाना था  सो कुछ ले दे के वो भी किया   और ८ अप्रैल २०११ को १२:३४   बजे मैंने अपनी दस साल की मेहनत से  बो नोकरी पा ली जिससे मै बिलकुल भी  नहीं करना छठा था पर क्या  करू   जिन्दगी  नाम ही तो समझोता है                           इस सब के बाद भी मेरी यात्रा जारी रहेगी   पर अब क्या खोजना चाहता हु अभी मैंने उसे परिभाषित नहीं किया है

Tuesday, March 22, 2011

शुन्यता

                         कुछ ke    पास इतना काम रहता है की वो कहते है की उनके पास सांस लेने तक का समय नहीं रहता है   मेरे कई दोस्त है जिनके पास कई तरह ke काम होते है   फ़िलहाल मे इक अजीब  सी समस्या  नहीं पर ,पता नहीं क्यों  कुछ अजीब सा लग रहा है मेरा  सेलेक्शन  हो गया है पर अभी तक जोइनिंग नहीं हुए है फ़िलहाल सेलेक्शन    हुए चार माह हो गए है    ज्वाइन नहीं हुआ है दिनभर   टी व्  देखते हुए  खाना खाने और सोने मे बीती है जब पड़ाई   करता था दिल्ली  मे तो दिन भर  पड़ाई मे  लगता  था  पर अब  इक अजीब सी शुन्यता  महसूस होती है न तो  भविष्य की  चिंता होती न ही अपने वो दिन याद  आते  जब दिन भर नोकरी की चिंता होती थी कोई मिलने आ जाता  था तो लगता ये  कब जायेगा पर अब लगता है कोई आ जाये तो कभी न जाये    इस जिन्दगी मे अजीब सी बाते होती है जब टाइम होता है तो दोस्त और  पैसा नहीं होता और जब पैसा होता है तो दोस्त और टाइम नहीं होता   kya मान लेना चाहिए ke जीवन ऐसा  ही चलना है ?    नहीं हमें हमेशा कुछ नया करना चाहिए   नहीं तो  कहते ke जंग लग जाती है सोच मे     जिन्दगी मे   दरअसल कुछ नया करना दोस्तों ke साथ घुमना   हमारी मजबूरी है क्योंकि हम व्यस्त रहकर खुद  को भूलना चाहते है जब हम केबल अपने तक सीमित हो जाते  है  तो बास्तव मे हम किसी तक नहीं  जा पाते  ना  तो अपने पास न  दूसरो  ke इकदम ख़ाली बेठने से तो अच्छा है ke हम बिना   सर पैर ke काम करे              हमें हर  हाल मे  नया करते रहना चाहिए  नयापन ही  जीबन है

Saturday, March 19, 2011

बोलो प्यारे होली है

पता नहीं कब से ये शब्द "बोलो प्यारे होली है " मेरे मोहल्ले में गूंजते _गूंजते  मेरे मुह से भी निकलने लगे  आज हमारे मोहल्ले मे  फिर छोटे -छोटे बच्चे वही शब्द बोल रहे थे    हमारे  शहर में  गली गली चोराहे पर होली जलाई जाती है वहा इक बास मे गेहू की बाले और चने के पेड़ को बाधकर जलाते है माना जाता है की यह पहली फसल का अग्नि देवता  को अर्पण होता है  होली के बीच का झंडा जिस दिशा में गिरता है बहा फसल  काफी अच्छी होती है  उसी होली से सब लोग थोड़ी सी आग घर पर ले आते जहा गोबर से बनाये गए गोल गोल बरुले जलाये जाते है उसमे थोडा सा आटा राइ से  सबकी नजर उतारी जाती है   पास में ही मंदिर मे  राइ नाच होता है जिसकी नगड़िया आवाज मेरे कानो तक पहुचती     रहती है थोड़ी  देर बाद लोगो  के झुण्ड रात मे सडको पर निकलता है और कुछ नारे लगता है  जैसे ''बोलो प्यारे होली है  , इक लकडिया दो कंडा हम होली के पंडा , होली के हुडदंग मे बब्बा बूदी तंग  मे ,इत्तो अंडा कए को आल को जो कोई -- की लुगाई को --ने बोले --को   अगले दिन धुरेडी होती है जिसमे सारा शहर  रंगों से सरोबर हो जाता है -----------------बोलो प्यारे होली है |

Wednesday, March 16, 2011

नाक मे मूंगफली

   आज इक  अजीब घटना मेरे भतीजे ने की   खेलते -खेलते उसने अपनी नाक मे मुन्फाली दाल दी  दोड़कर डाक्टर के पास ले गया  डाक्टर  ने काफी प्रयाश किया पर काफी कोशिश के बाद वह न निकल न पाई और कई लोगो ने कई पुराने केश भी सुनाये किशी ने कहा की इक बच्चे ने नाक मे कांच दल लिया था   तो इक़ ने बताया की किसी ने चना तो किसी ने चूड़ी का टुकड़ा डाल लिया था   इक़ बात नहीं समझ सका की ये बच्चे हर बो कम क्यों कर जाते जिसे  करने मे हम डरते है    !!!!    शायद बच्चो मे उस तरह का दर नहीं होता जिस तरह का हमारे भीतर  करता है   हम तो  हर छोटी बात बात को लाख बार सोचते है फिर करते है   !!!!!    यदि जीबन को जीना है जिंदगी की तरह तो हमें    डरना छोड़ना होगा पर क्या हम ऐसा कर सकते है    शायद नहीं !!!!!

Tuesday, March 15, 2011

नशा मुक्ति से नशा प्राप्ति तक

 आज  मेरे मित्र सत्यावेंद्र सिंह ने  बड़ा कार्यक्रम आयोजित करवाया था जिसमे धर्म के साथ इक बात और थी उसमे नशा मुक्ति का भी प्रण लिया गया और प्रण करने बालो को लाल रंग की पट्टी गले मे डालकर कसम खिलाई गई के बे अब दोबारा    नशा नहीं करेंगे  काफी अच्छा प्रयाश  रहा  हालंकि इस कार्यक्रम के जो सूत्रधार थे उनके नाम जब जय कारे लगाये गए तो मेरे साथ कई लोगो को  आश्चर्य हुआ की भगवन और इंशान के बीच मे इक इन्सान भगवन बनकर क्यों  आ गया   उसी संघटन के कई लोगो ने बाद मे इन्ही सब चीजो का खंडन कर कहा की गुरूजी सभी के है और सब मे बसते है पर कई लोगो क बात हज़म नहीं हो पाई  खेर कार्यक्रम सफल कहा जा सकता है क्योंकि कई लोगो ने नशा मुक्ति का प्रण लिया है   हालंकि इक नशा पिलया जा रहा था   यह नशा फिर   धर्म का था   नए धर्म और नए इश्वर का था कभी भी भगवन मानव को कस्ट नहीं देना चाहता है पर कस्ट तो होना ही है आजकल  गाव मे  कस्ट निबारण का इक आन्दोलन सा  चल पड़ा है कई  तरह के भगवन देवता देवदूत और संत पैदा हो गए है कई के बारे मे हम कई ता रह की शर्मनाक और   शर्मनाक घटनायो को सुनते है देखते तो मन मे उ नके प्रति कुछ संकाए  भी पैदा होती है   कही  कही तो इनका उद्देश्य राजनीतिक तक हो जाता है खेर  धोडे पैसे खर्च करवाकर ये तथाकथित  संत नशा मुक्ति और कस्ट निबारण का नशा देकर कुछ भी  गलत नहीं करते है   क्या मे सच कह रहा हु

Sunday, March 13, 2011

समय बिताने के लिए करना है कुछ काम

  जीवन के  लिए काम  कितना जरुरी है अब पता चलने लगा है |  कई अवसरों पर  हम देखते है की  बच्चे सबसे कम परेशां होते है  क्योंकि हर दम   काम करते बो बिना सर पैर के काम करते   मतलब हर दम ब्यस्त रहते है और मस्त रहते है | हम फिर अपने कॉलेज मे पहुचते है और फिर हम परेशां होने  लगते है क्योंकि हम कुछ सपने बुनने  लगते  उन्हें पाने के कोशिश करने लगते है पर   हम हमेशा सपनो और  हकीकत मे काफी अंतर पाते है   और कस्ट महसूस  करते है शायद  बड़े लोग सबसे ज्यादा परेशां होते है इसका कारन ये है की उनके पास कोई कम नहीं होता बो  हमेशा बोर होते है उनके पास दो चार कम रह जाते जैसे सब्जी लाना   या फिर किसी पूरानी बस्तुओ  से कुछ ऐसा खोज लेना  जो उन्हें लगता  है काफी उपयोगी है उसमे अपने गोरवशाली अतीत   को खोजना   उसमे कुछ ऐसा  खोजना जिससे उनकी  बुध्धिमात्ता का प्रकट हो जाये कुछ बाते हमें बिना सर पैर  के लगेगी तो कई जगह       हमें  लगता है हम इनसे कई  कदम आगे है पर  कदम      का क्या  जो आज आगे है वो कल पीछे हो सकता है
                                      आजकल जो   फिल्म टी.वी    आदि का प्रचार  हो रहा है उसका कारन शायद यही है की हमारे पास समय  बिताने  के लिए कुछ काम नहीं होता   हम इन्टरनेट का  का विकाश  करते है  हम sach  मे  नहीं judte      हम हमेशा apno  से और अपने aap से  tak door  रहते है 
    

Sunday, March 6, 2011

कम है


लग रह है अब सब कुछ ख़तम हो गया है शायद मैंने वो खो दिया है जो मै इस जीबन मे कम से कम बीस साल नहीं और शायद इस जीबन मे तो कभी भी नहीं पा सकता   हे भगबान अगली बार मुझे फिर भारत मे  जन्म देना मे अपनी  कसम पूरी करना चाहता हु  नहीं तो मेरी आत्मा को शांति  नहीं मिलेगी   
                               मै मानता हु  की हमेशा की  तरह इस बार फिर मुझमे कुछ कामिया होगी पर अब क्या करू मेरे पास तो अब अपने आप को सुधरने का अवसर ही  नहीं रह गया     इस अवसर को खोने का गम तो है ही    जीबन के पिछले दस साल हर पल मेरी आँखों के सामने से हर पल गुजरते रहते है कभी  किसी अधिकारी को  रोब दिखाते देखता हु या फिर किसी को परेशां होते देखता हु तो बस यही लगता है की मै क्यूँ   कुछ  नहीं कर पाया
                                         कभी कभी इक ही  पल मे  मेरा सारा इतिहास मेरी आँखों सामने से गुज़र जाता  है साथ hee  यह भयानक  सच  की मै अब वो नहीं कर पाउँगा  
 अपनी अम्मा  पापा से यह  कह सकू  जो मै चाहता था वो  मैंने पा लिया   

                        जितने  आंसू आँखों से बहते दीखते है उससे भी ज्यादा  दो तो दिल मै ही  सूख जाते है ऐसे समय  मै रुलाने बाले भी कई जगह मिलेगे   पर उन्हें तो पता ही नहीं की मेरे साथ  क्या  हो गया है

       १० साल  के बाद  मै बो पद नहीं पा सका जो मैंने चाही फिर आज इक पोस्ट है   फिर हर कोई मुझसे से कहता की तुम्हारी   कोशिश कम थी       क्या बो सच कहता है     इक छोटी सी पोस्ट की खोज   के साथ शुरू हुआ सफर इक बड़ी पोस्ट के कोशिश मै इक छोटी पोस्ट पर  ख़त्म हो गया
              मुझे हर बो इन्सान याद आ रहा  है जिसे मैंने अपनी पढाई के   कारन नजर अंदाज किया हर वो त्यौहार जो एक्साम  के  कारन  छोड़   दिया        कोई  मेरा बीता हुआ समय लोटा सकता है  ?       नहीं           
         क्या आई ए  एस  बन्ने के  लिए इक जीबन कम है ????

Friday, February 4, 2011

अपने आप से लड़ाई

कभी कभी  छोटी सी बाते बड़ी लगने लगती है हमारे अपने हमें परये लगने लगते है  मै  नहीं जनता की  मै सही होता हू या  गलत  पर पता नहीं हर दिन किसी छोटी सी बात पर मन कुछ परेशां हो जाता है हम किसी से कुछ नहीं चाहते पर मन कोई ऐसा सुन लेता है जो हम नहीं चाहते या कोई ऐसा कह देता है या हम ऐसा कुछ सुन लेते है जो हम नहीं चाहते ऐसा क्यों  होता है शायद अपेक्षा है  जो हमें यहाँ तक ले आती तो क्या करू अपेक्षा रहित जीबन कैसे जीउ

Wednesday, January 12, 2011

आपका पद [post]अच्छा नहीं है

  अरे आपका चयन  हो गया !! पी .एस.सी  से हुआ है अरे वाह !!  मगर किस   पोस्ट पर? जी छोटी सी है  सेकंड क्लास है मगर डेपुटी कलेक्टर   भी तो सेकंड क्लास है !! मगर  आपके पोस्ट मै उपरी कमाई नहीं है इससे अच्छी तो थर्ड  क्लास kee है उसमे काफी उपरी कमाई  है???

छुपे हुए इरादे [लघु कथा]

             अरे आप से क्या पैसे लेना आप तो  मेरे बड़े भाई जैसे है और बताये घर पर सब कुछ ठीक है न और कोई जरुरत लगे तो मांग लेना  और चाहो तो फ़ोन कर लेना ?मगर सर आपका तो फ़ोन ख़राब है! अरे ठीक भी होता तो मै न उठाता सर लेकिन ?अरे समझा करो मम्मी चुनाव लड़ रही है न !!!